अज्ञान भोग है। ज्ञान त्याग है। त्याग क्रिया नहीं है। वह करना नहीं होता है। वह हो जाता है। वह ज्ञान का सहज परिणाम है। भोग भी यांत्रिक है। वह भी कोई करता नहीं है। वह अज्ञान की सहज परिणति है। फिर, त्याग के कठिन और कठोर होने की बात ही व्यर्थ है। एक तो वह क्रिया ही नहीं है। क्रियाएं ही कठिन और कठोर हो सकती हैं। वह तो परिणाम है। फिर उससे जो छूटता मालूम होता है, वह निर्मूल्य और जो पाया जाता है, वह अमूल्य होता है।-ओशो
जीवन से सम्बंधित हर एक प्रिय और अप्रिय विषय पर महान योगी आचार्य रजनीश ओशो के अमूल्य, बेबाक और मार्गदर्शक विचारों का संकलन!
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Tuesday, 25 February 2014
ज्ञान और अज्ञान
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